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राजकीय उपक्रम ब्यूरो का परिचय 

राजकीय उपक्रम विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में वर्ष 1978 में राजकीय उपक्रम ब्यूरो का गठन किया गया था।

1.

मुख्य सचिव

अध्यक्ष

2.

वित्त सचिव 

सदस्य

3.

उद्योग सचिव

सदस्य

4.

राज्य उद्यमों के दो मुख्य अधिशाषी जो वार्षिक चक्र क्रम के आधार पर नाम निर्दिष्ट किये जायेंगे

सदस्य

5.

प्रबंध/वित्त/वाणिज्यिक लेखांकन/प्रौधोगिकी के क्षेत्रो में से दो विशेषज्ञ जो राज्य सरकार द्वारा नाम निर्दिष्ट किये जायेंगेप्रबंध/वित्त/वाणिज्यिक लेखांकन/प्रौधोगिकी के क्षेत्रो में से दो विशेषज्ञ जो राज्य सरकार द्वारा नाम निर्दिष्ट किये जायेंगे

सदस्य

6.

सचिव राजकीय उद्यम 

सदस्य सचिव

ब्यूरो के कार्य निम्नानुसार होंगे:-

1. समस्त राजकीय पब्लिक सेक्टर उपक्रमों के कृत्यकरण का अनुश्रवण (मोनिटरिंग), पूर्वालोकन और मूल्यांकन इस दृष्टि से करना की जिनसे व्यष्टिक ईकाइयों, को अधिकतम प्रबंधकीय दक्षता और विनिधानों पर अनुकूलतम परिणाम प्राप्त करते हुये अपने निगमित उदेश्य प्राप्त करने में सहायता मिलें ।

2. राजकीय उपक्रमों और/या उनके बोर्डो, शासी निकायो में सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट निदेशको/सदस्यों को ऐसे दिशानिर्देश जारी करना जो उद्यम के प्रबंधको पद्धतियों प्रकियाओं, प्रोद्योगिकी, प्रबंध पद्धतियों, लेखांकन, गुणवता, नियंत्रण में और विभिन्न अन्य क्षेत्रो में समुचित शोधक उपाय करने और सुधार लाने के लिए समय-समय पर आवश्यक समझे जायें। 

3. विभिन्न राजकीय उद्यमों के कार्यकरण को समुचित करना और यह प्रयास यह प्रयास करना कि सामान्य प्रकार के विषयों में जैसे कि कार्मिक नीतिया और प्रकियाऐ, भर्ती प्रकियाऐं, व्यक्तियों को प्रशिक्षण और नियोजन, मजदूरी संरचना, क्रय और व्ययन प्रक्रियाओं सहित भंडार प्रबंध स्टाफ व कल्याण सम्बन्धी फायदेमन्द और ऐसे ही विषयों में, एक निश्चित अंश तक दृष्टिकोण की एकरूपता हो। 

4. ऐसे क्षेत्रों का पता लगाने में सहायता करना, जहां विभिन्न राजकीय उपक्रमों के बीच क्रर्यो, विपणन, वित्त पोषण के क्षेत्रो में समन्वित या संयुक्त प्रयासों के लिए सम्पर्क  और अवसर, स्थापित किये जा सके।

5. समस्त पब्लिक सेक्टर के उपक्रमों के लिए सूचना के संग्रह एवं प्रसारण हेतु  समाशोधन के रूप में कार्य करना। 

6. ऐसे अन्य कृत्य जो समय-समय पर सरकार द्वारा ब्यूरो को सौपें जाये। लोक उद्यम ब्यूरो एक स्थायी निकाय होगा इसका प्रशासनिक विभाग राजकीय उपक्रम विभाग होगा।      

 सरकार के आदेश क्रमांक एफ23(2)एआर/1/78 दिनांक 6 अक्टुबर 1978 जिसके द्वारा वित्त विभाग में एक विनिधान प्रकोष्ठ सृजित किया गया था, इस सीमा तक उपान्तरित समझा जायेगा की वह लोक उद्यम ब्यूरो के लिए निर्धारित कोई भी कृत्य अब नही करेगा।  विनिधान प्रकोष्ठ, लोक विनिधानों, और सरकारी आदेश संख्या एफ7(56)एआर/5/78 दिनांक 29.09.1978 द्वारा गठित पब्लिक निवेश बोर्ड से सम्बन्धित कार्यकर्ता रहेगा और यह सुनिश्चित करेगा  कि समस्त राजकीय उपक्रम:-

(क) उपक्रम समग्र रूप से उपक्रम के साथ ही साथ इसकी प्रत्येक सहायक ईकाई के पूर्ण और वैज्ञानिक रूप से तैयार वाणिज्यिक लेखे रखे जाते है।  

(ख) समुचित विनिश्चिय करने और समय पर शोधक उपाय करने की दृष्टि से तलपट, लाभ ओर हानि और व्यापारिक खाते, नकद आय व्यय विवरण आदि तैयार करने के साथ साथ  उपक्रमों के वित्तीय कार्यकरण को नियमित सावधिक पुर्नावलोकन करते है।

(ग) अपने लेखो की संपरीक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएँ  करते हैं।

(घ) समय पर वार्षिक लेखे तैयार करते हैं। 

 वर्तमान में राजकीय उपक्रम ब्यूरो के दायरे में 34 राजकीय उपक्रम हैं। राजकीय उपक्रम ब्यूरो के प्रशासनिक नियंत्रण में कोई भी राजकीय उपक्रम नहीं है। इन राजकीय उपक्रमों के पास अलग से प्रशासनिक विभाग हैं और अपने विभाग के प्रत्यक्ष नियंत्रण में काम करतें है। ये उद्यम, अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में काम करते है। कुछ उद्यम चीनी, खनन, रसायन और खनिज आदि जैसे भी निर्माण गतिविधियों में लगे हुये है, कुछ पर्यटन वेयरहाउसिंग कृषि आदानों के प्रावधान, आवास, सडक परिवहन और बिजली आदि गतिविधियों में लगे हुये है। कुछ अन्य औद्योगिक विकास के लिए वित्तीय संस्थानों के रूप में कार्य करते है। राज्य में इन राजकीय क्षेत्र के उपक्रमों में निवेश की बढती मात्रा ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, महत्वपूर्ण आदानों के प्रावधान में सहायता की है।